एक बार जी भर के सज़ा क्यूँ नही देते?
गर इश्क-ऐ-खता हूँ तो मिटा क्यूँ नही देते?
साया हूँ तो साथ न रखने की वजह क्या है?
पत्थर हूँ तो रस्ते से हटा क्यूँ नही देते??
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मुद्दत से किसी से मिलने की थी आरजू,
ख्वाहिशे दीदार में सबकुछ गवा दिया,
किसी ने कहा की आयेंगे वो रात को,
इतना किया उजाला की अपना घर ही जला दिया....
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कतरा कतरा बहते थे आंसू ,
हम उन्हें सुखा भी न पाए,
इससे बड़ी वफ़ा की सज़ा क्या होगी?
वो रोये हमसे लिपट कर ,
किसी और के लिए,
और हम उन्हें हटा भी न पाए......
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गमें ज़िन्दगी के मारे है,
हर बाजी जीत के भी हारे है,
मेरी झोली में जो पत्थर है,
ये मेरे चाहने वालो ने मारे है.....
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Friday, July 10, 2009
Thursday, June 18, 2009
मुश्किल है......
मोहब्बत का इरादा अब बदल जाना भी मुश्किल है,
तुझे खोना भी मुश्किल है, तुझे पाना भी मुश्किल है.
जरा सी बात पर आंखें भिगो के बैठ जाते हो,
तुझे अब अपने दिल का हाल बताना भी मुश्किल है,
उदासी तेरे चहरे पे गवारा भी नहीं लेकिन,
तेरी खातिर सितारेतोड़ कर लाना भी मुश्किल है,
यहाँ लोगों ने खुद पे परदे इतने डाल रखे हैं,
किस के दिल में क्या है नज़र आना भी मुश्किल है,
तुझे ज़िन्दगी भर याद रखने की कसम तो नहीं ली,
पर एक पल के लिए तुझे भुलाना भी मुश्किल है...............
तुझे खोना भी मुश्किल है, तुझे पाना भी मुश्किल है.
जरा सी बात पर आंखें भिगो के बैठ जाते हो,
तुझे अब अपने दिल का हाल बताना भी मुश्किल है,
उदासी तेरे चहरे पे गवारा भी नहीं लेकिन,
तेरी खातिर सितारेतोड़ कर लाना भी मुश्किल है,
यहाँ लोगों ने खुद पे परदे इतने डाल रखे हैं,
किस के दिल में क्या है नज़र आना भी मुश्किल है,
तुझे ज़िन्दगी भर याद रखने की कसम तो नहीं ली,
पर एक पल के लिए तुझे भुलाना भी मुश्किल है...............
Tuesday, June 16, 2009
भगवान का दस्तूर भी अजीब है, कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता.....
न मेरी साँसे चले, न मेरे पल दिन कटे,
बीते न मेरे दिना, तेरे बिना......
तुने दिया दर्दे जिगर, दिल पे हुआ ऐसा असर,
आँखें बंद जब करू, तेरा ही एक चेहरा,
लम्हा लम्हा यारा, आये नज़र,
तेरी कशिश तडपाती है, पागल मुझे कर जाती है,
दूरी तेरी अनजाने में, मेरे करीब तुझे लाती है,
दिल की लगी, दिल में आशिकी, सहना यहाँ, मुश्किल है बड़ा....
तेरे बिना ...तेरे बिना......
जानू ये मैं, जाने खुदा, तुझपे सदा हक़ है मेरा,
दावा है ये मेरा, आशिकी ये मेरी, धडकनों में तेरी रह जायेगी,
कहती मेरी दीवानगी, रूह में, तू ही तू बसी,
वीरानियों का है समा, तेरे सिवा ये ज़िन्दगी,
क्या ये ज़मीन, क्या आसमा,
सूने मेरे, है दोनों जहाँ,
तेरे बिना .....तेरे बिना....
बीते न मेरे दिना, तेरे बिना......
तुने दिया दर्दे जिगर, दिल पे हुआ ऐसा असर,
आँखें बंद जब करू, तेरा ही एक चेहरा,
लम्हा लम्हा यारा, आये नज़र,
तेरी कशिश तडपाती है, पागल मुझे कर जाती है,
दूरी तेरी अनजाने में, मेरे करीब तुझे लाती है,
दिल की लगी, दिल में आशिकी, सहना यहाँ, मुश्किल है बड़ा....
तेरे बिना ...तेरे बिना......
जानू ये मैं, जाने खुदा, तुझपे सदा हक़ है मेरा,
दावा है ये मेरा, आशिकी ये मेरी, धडकनों में तेरी रह जायेगी,
कहती मेरी दीवानगी, रूह में, तू ही तू बसी,
वीरानियों का है समा, तेरे सिवा ये ज़िन्दगी,
क्या ये ज़मीन, क्या आसमा,
सूने मेरे, है दोनों जहाँ,
तेरे बिना .....तेरे बिना....
Friday, June 12, 2009
प्यार से प्यार तो कर के देख....
कभी प्यार से प्यार तो कर के देख
इसे मेरी नज़र से तो कर के देख
जो कभी भी पाना हो मेरा प्यार तो
जरा आँख में आंसू तो भर के देख
है इश्क में एक खौफ भी, और खौफ में मज़ा भी है
जो चाहिए ये मज़ा कभी तो ज़माने से तू डर के देख
इस इश्क की वजह है क्या, दिल की लगी या दिल्लगी
गर जानना है तुझको कभी, तो मेरे दिल में तू उतर के देख
इसे मेरी नज़र से तो कर के देख
जो कभी भी पाना हो मेरा प्यार तो
जरा आँख में आंसू तो भर के देख
है इश्क में एक खौफ भी, और खौफ में मज़ा भी है
जो चाहिए ये मज़ा कभी तो ज़माने से तू डर के देख
इस इश्क की वजह है क्या, दिल की लगी या दिल्लगी
गर जानना है तुझको कभी, तो मेरे दिल में तू उतर के देख
Monday, October 20, 2008
किसी गरीब की बस्ती जला दी तुमने....
किसी गरीब की बस्ती जला दी तुमने,
किसी बेनाम की हस्ती मिटा दी तुमने,
महल न सही, मगर उसका तो वो आशियाना था,
किसी मुफलिस को औकात दिखा दी तुमने,
सब्र ना रहा, मगर फिर भी वो बेजबान था,
किसी शायर को खामोशी सिखा दी तुमने,
उम्र तो थी बाकि, मगर जिंदा भी वो कहाँ था,
किसी भुझी हुयी चिंगारी को हवा दी तुमने,
दर्द भरी ज़िन्दगी में, खुशी का वो लम्हा था,
किसी की हकीक़त को कहानी बना दी तुमने,
रही जो अनकही, वो ज़िन्दगी का एक अरमान था,
किसी ज़ाकिर को बदनसीबी सुना दी तुमने,
किसी गरीब की बस्ती जला दी तुमने,
किसी बेनाम की हस्ती मिटा दी तुमने.......
किसी बेनाम की हस्ती मिटा दी तुमने,
महल न सही, मगर उसका तो वो आशियाना था,
किसी मुफलिस को औकात दिखा दी तुमने,
सब्र ना रहा, मगर फिर भी वो बेजबान था,
किसी शायर को खामोशी सिखा दी तुमने,
उम्र तो थी बाकि, मगर जिंदा भी वो कहाँ था,
किसी भुझी हुयी चिंगारी को हवा दी तुमने,
दर्द भरी ज़िन्दगी में, खुशी का वो लम्हा था,
किसी की हकीक़त को कहानी बना दी तुमने,
रही जो अनकही, वो ज़िन्दगी का एक अरमान था,
किसी ज़ाकिर को बदनसीबी सुना दी तुमने,
किसी गरीब की बस्ती जला दी तुमने,
किसी बेनाम की हस्ती मिटा दी तुमने.......
Friday, September 26, 2008
बिखर जाऊंगा........
इतना टूटा हूँ की छूने से बिखर जाऊंगा,
अब और दुआ दोगे तो मर ही जाऊंगा॥
पूछकर मेरा पता वक्त जाया न करो अपना,
मैं तो बंजारा हूँ न जाने किधर जाऊंगा॥
हर तरफ़ धुंध है, जुगनू है, न चिराग कोई,
कौन पहचानेगा ? बस्ती में अगर आ जाऊंगा॥
ज़िन्दगी, मैं भी मुसाफिर हूँ तेरी कश्ती का,
तू जहाँ मुझसे कहेगी मैं उतर जाऊंगा॥
फूल रह जायेंगे गुलदान में यादों की तरह,
मैं तो खुशबू हूँ फिजाओं में बिखर जाऊंगा॥
इतना टूटा हूँ की छूने से बिखर जाऊंगा,
अब और दुआ दोगे तो मर ही जाऊंगा.......
अब और दुआ दोगे तो मर ही जाऊंगा॥
पूछकर मेरा पता वक्त जाया न करो अपना,
मैं तो बंजारा हूँ न जाने किधर जाऊंगा॥
हर तरफ़ धुंध है, जुगनू है, न चिराग कोई,
कौन पहचानेगा ? बस्ती में अगर आ जाऊंगा॥
ज़िन्दगी, मैं भी मुसाफिर हूँ तेरी कश्ती का,
तू जहाँ मुझसे कहेगी मैं उतर जाऊंगा॥
फूल रह जायेंगे गुलदान में यादों की तरह,
मैं तो खुशबू हूँ फिजाओं में बिखर जाऊंगा॥
इतना टूटा हूँ की छूने से बिखर जाऊंगा,
अब और दुआ दोगे तो मर ही जाऊंगा.......
Tuesday, September 9, 2008
मन को मना लिया मैंने......
अपने मन को मना लिया मैंने,
जिंदगी से निभा लिया मैंने !
एक खुशबू सी तेरी याद आयी,
एक पल मुस्करा लिया मैंने !
प्यास तड़पी तो पी लिया आंसू,
भूख में गम को खा लिया मैंने !
दर्द का गीत एक तड़पता सा,
प्यार में गुनगुना लिया मैंने !
मुझपे इल्जाम है ज़माने का,
क्यों तेरा दिल चुरा लिया मैंने,
जब कभी नींद मुझसे रूठ गयी,
चाँद को घर बुला लिया मैंने !
किस तरह खुशनसीब हूँ मै भी,
तुमको ख्वाबों में पा लिया मैंने !!
जिंदगी से निभा लिया मैंने !
एक खुशबू सी तेरी याद आयी,
एक पल मुस्करा लिया मैंने !
प्यास तड़पी तो पी लिया आंसू,
भूख में गम को खा लिया मैंने !
दर्द का गीत एक तड़पता सा,
प्यार में गुनगुना लिया मैंने !
मुझपे इल्जाम है ज़माने का,
क्यों तेरा दिल चुरा लिया मैंने,
जब कभी नींद मुझसे रूठ गयी,
चाँद को घर बुला लिया मैंने !
किस तरह खुशनसीब हूँ मै भी,
तुमको ख्वाबों में पा लिया मैंने !!
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