Tuesday, September 9, 2008

मन को मना लिया मैंने......

अपने मन को मना लिया मैंने,
जिंदगी से निभा लिया मैंने !
एक खुशबू सी तेरी याद आयी,
एक पल मुस्करा लिया मैंने !
प्यास तड़पी तो पी लिया आंसू,
भूख में गम को खा लिया मैंने !
दर्द का गीत एक तड़पता सा,
प्यार में गुनगुना लिया मैंने !
मुझपे इल्जाम है ज़माने का,
क्यों तेरा दिल चुरा लिया मैंने,
जब कभी नींद मुझसे रूठ गयी,
चाँद को घर बुला लिया मैंने !
किस तरह खुशनसीब हूँ मै भी,
तुमको ख्वाबों में पा लिया मैंने !!

3 comments:

फ़िरदौस ख़ान said...

शानदार...अच्छी रचना है...

तरूश्री शर्मा said...

प्यास तड़पी तो पी लिया आंसू,
भूख में गम को खा लिया मैंने !
दर्द का गीत एक तड़पता सा,
प्यार में गुनगुना लिया मैंने !

अच्छी रचना... खूबसूरत उपमानों के साथ।

Udan Tashtari said...

वाह! बहुत सुन्दर.बधाई.