कभी प्यार से प्यार तो कर के देख
इसे मेरी नज़र से तो कर के देख
जो कभी भी पाना हो मेरा प्यार तो
जरा आँख में आंसू तो भर के देख
है इश्क में एक खौफ भी, और खौफ में मज़ा भी है
जो चाहिए ये मज़ा कभी तो ज़माने से तू डर के देख
इस इश्क की वजह है क्या, दिल की लगी या दिल्लगी
गर जानना है तुझको कभी, तो मेरे दिल में तू उतर के देख
Friday, June 12, 2009
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10 comments:
रचना में सुन्दर भाव के साथ साथ खूबसूरत तस्वीर भी। अच्छा लगा। आपने कहा कि-
है इश्क में एक खौफ भी, और खौफ में मज़ा भी है
जो चाहिए ये मज़ा कभी तो ज़माने से तू डर के देख
किसी शायर ने कहा है कि-
मुहब्बत ही मुहब्बत जिन्दगी है गर कोई समझे।
वर्ना जिन्दगी तो मौत के साये में पलती है।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.
ek khubsoorat bhawabyakti.....chitratamkata hai aapkee kawita me
प्यार की खुमारी उतरने में अपना वक्त है...कोई और रास्ता नहीं.
कभी प्यार से प्यार तो कर के देख..
....खूबसूरत ख्याल ...
bahut khoob !
है इश्क में एक खौफ भी, और खौफ में मज़ा भी है
जो चाहिए ये मज़ा कभी तो ज़माने से तू डर के देख
बहुत ही उम्दा।
भाव के स्तर पर कविता काफी प्रभावित करती है । -
http://www.ashokvichar.blogspot.com
This poem is touchable of heart.
Ravindra Kailasia
my blog is
servsatyanaash.blogspot.com
Shukriya Doston!!!
कभी प्यार से प्यार तो कर के देख
इसे मेरी नज़र से तो कर के देख
nazar kee yah ada bahut pyari lagi
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