एक बार जी भर के सज़ा क्यूँ नही देते? गर इश्क-ऐ-खता हूँ तो मिटा क्यूँ नही देते? साया हूँ तो साथ न रखने की वजह क्या है? पत्थर हूँ तो रस्ते से हटा क्यूँ नही देते?? ________________ मुद्दत से किसी से मिलने की थी आरजू, ख्वाहिशे दीदार में सबकुछ गवा दिया, किसी ने कहा की आयेंगे वो रात को, इतना किया उजाला की अपना घर ही जला दिया.... ___________________ कतरा कतरा बहते थे आंसू , हम उन्हें सुखा भी न पाए, इससे बड़ी वफ़ा की सज़ा क्या होगी? वो रोये हमसे लिपट कर , किसी और के लिए, और हम उन्हें हटा भी न पाए...... ___________ गमें ज़िन्दगी के मारे है, हर बाजी जीत के भी हारे है, मेरी झोली में जो पत्थर है, ये मेरे चाहने वालो ने मारे है..... __________________
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प्यार से प्यार तो कर के देख....
कभी प्यार से प्यार तो कर के देख इसे मेरी नज़र से तो कर के देख जो कभी भी पाना हो मेरा प्यार तो जरा आँख में आंसू तो भर के देख है इश्क में एक खौफ भी, और खौफ में मज़ा भी है जो चाहिए ये मज़ा कभी तो ज़माने से तू डर के देख इस इश्क की वजह है क्या, दिल की लगी या दिल्लगी गर जानना है तुझको कभी, तो मेरे दिल में तू उतर के देख
मुश्किल है......
मोहब्बत का इरादा अब बदल जाना भी मुश्किल है , तुझे खोना भी मुश्किल है, तुझे पाना भी मुश्किल है. जरा सी बात पर आंखें भिगो के बैठ जाते हो, तुझे अब अपने दिल का हाल बताना भी मुश्किल है, उदासी तेरे चहरे पे गवारा भी नहीं लेकिन, तेरी खातिर सितारेतोड़ कर लाना भी मुश्किल है, यहाँ लोगों ने खुद पे परदे इतने डाल रखे हैं, किस के दिल में क्या है नज़र आना भी मुश्किल है, तुझे ज़िन्दगी भर याद रखने की कसम तो नहीं ली, पर एक पल के लिए तुझे भुलाना भी मुश्किल है...............
Comments
धीरे से तुम्हारे कानो में, एक बात पुरानी कह देंगे,
वाह!!!
***राजीव रंजन प्रसाद
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